"A Revolution Against Over Population"                                  Jansankhya Samadhan Foundation

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"शीघ्र सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू न हुआ तो संसाधन संकट से देश में होंगे गृहयुद्ध के हालात....."                                                             "Give A Miss Call At 8000303366 To Support The Movement....."

    जनसंख्या विस्फोट से उत्पन्न संसाधन व सामाजिक संकट से भारत पल प्रतिपल गृहयुद्ध की ओर अग्रसर है। जनसंख्या संकट से भविष्य में हालात बेकाबू होकर देश विघटित न हो जाये, इसका उपाय सख्त जनसंख्या नियंत्रण कानून है।

    आज देश की आबादी 135 करोड़ से अधिक है और आने वाले कुछ ही वर्षों में हम चीन को पीछे छोड़ देंगे जबकि हमारा कुल क्षेत्रफल चीन के क्षेत्रफल का एक तिहाई भी नहीं है। विश्व का केवल 2.4% भूभाग हमारे पास है और विश्व की कुल जनसंख्या का हम 17.74% भार वहन कर रहे हैं। कम क्षेत्रफल होने के बावजूद इतनी अधिक आबादी का ही परिणाम है कि उपलब्ध संसाधन बहुत तेजी से कम पड़ते जा रहे हैं।

    ऐसा नहीं है कि देश ने प्रगति नहीं की, परंतु सारे विकास को जनसंख्या रूपी दानव निकल रहा है और सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही जनसंख्या के सामने यह विकास ऊंट के मुंह में जीरे के समान साबित हो रहा है।

    यह साफ है कि इतनी बड़ी आबादी के लिए स्कूल, कॉलेज, हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन, मेट्रो, सड़क, एयरपोर्ट, प्रशासनिक दफ्तर, कारखाने और आवास उपलब्ध कराने में ही खेती की जमीन घट जायेगी, जंगल नष्ट हो जायेंगे। खाने को पर्याप्त अन्य भी पैदा नहीं होगा, ना इतने लोगों के लिए शिक्षा की व्यवस्था हो पायेगी और ना ही चिकित्सा की। बेरोजगारी और बीमारी अपने चरम पर होंगी तथा व्यवसाय भी चारों ओर भुखमरी और गरीबी के कारण ठप पड़ जायेंगे। ऐसी स्थिति में एक दिन ऐसा आयेगा जब लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो जायेंगे और देश गृहयुद्ध के कगार पर होगा।

    चीन जैसे देश में कई दशक पहले इस समस्या को पहचान लिया था और उस पर काम किया। हमारे देश में वोट बैंक की राजनीति के कारण आजादी के बाद किसी भी सरकार अथवा राजनीतिक दल ने इस समस्या का समाधान तो दूर, इस पर चर्चा करना भी उचित नहीं समझा। देशहित के कुछ विषय ऐसे होते हैं जिन्हें केवल सरकारों अथवा लोगों के विवेक पर नहीं छोड़ा जा सकता। सरकार को इनका उपाय लोगों की निजी मान्यताओं से ऊपर उठकर सोचना पड़ता है।

    इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए "जनसंख्या समाधान फाउन्डेशन" पिछले लगभग 5 वर्षों से शांतिपूर्ण तरीके से कई राज्यों तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगातार धरने, प्रदर्शन, जागरूकता रैली तथा सांसद संवाद आदि कार्यक्रमों के माध्यम से सरकार के समक्ष देश में "सभी नागरिकों के लिए अधिकतम दो बच्चों का कानून" लागू करने की अपनी मांग उठा रहा है। इस विषय में 9 अगस्त 2018 को भारत के राष्ट्रपति जी से हमारी संस्था एवं सांसदों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने भेट करके उन्हें कानून के समर्थन में 125 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित हमारी संस्था का मांग पत्र सौंपा।

    जिस प्रकार बिल्ली को देख कर कबूतर अपनी आंख यह सोचकर बंद कर लेता है कि जब मुझे ही बिल्ली नहीं दिख रही तो बिल्ली भी मुझे कैसे देखेगी। यही रुख देश को गृहयुद्ध के कगार पर खड़ा कर चुकी बेलगाम बढ़ती जनसंख्या की ओर पूर्ववर्ती सरकारों का रहा है। कबूतर की तरह हम भले ही ध्यान ना दें, बिल्ली की तरह यह समस्या तो एक दिन अवश्य झपट्टा मारेगी। इस विकराल समस्या के झपट्टे से यह देश विघटित ना हो जाये, इसके लिए "जनसंख्या समाधान फाउन्डेशन" पिछले लगभग 5 वर्षों से "जनसंख्या आंदोलन" चला रहा है जिसकी मांग निम्न प्रकार है:

1.   कानून में भ्रम की स्थिति ना रहे और जाति, धर्म, भाषायी बंधनों से ऊपर उठकर, देशहित को सर्वोपरि मानते हुए यह कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू हो।

2.   इस कानून के दंडनीय प्रावधान दो जीवित संतानों के पश्चात् तीसरे बच्चे की उत्पत्ति करने वाले जैविक माता पिता पर लागू हो।

3.   तीसरी संतान उत्पन्न करने वाले दंपत्ति को मिलने वाले सभी सरकारी अनुदान व सब्सिडी आदि तत्प्रभाव से समाप्त हों।

4.   तीसरे बच्चे की उत्पत्ति करने वाले माता पिता तत्प्रभाव से राजकीय सेवा से वंचित किए जायें। ऐसे माता पिता केंद्र व राज्य शासन में तथा इनके अधीन संचालित किसी भी राजकीय विभाग में सेवक के रूप में अपने पद पर नहीं बने रह सकें और ना ही नियुक्त किए जा सकें।

5.   कानून तोड़कर तीसरी संतान उत्पन्न करने वाले जैविक माता-पिता व संतान को जीवन पर्यंत मताधिकार से वंचित किया जाये।

6.   कानून का एक बार उल्लंघन करने के बाद दोबारा उल्लंघन की स्थिति अर्थात चौथी संतान की उत्पत्ति की स्थिति में पिछली सजाओं के साथ-साथ दंपत्ति को 10 वर्ष की जेल की सजा का प्रावधान किया जाये ताकि चौथी संतान के बारे में कोई नागरिक स्वपन में भी ना सोच सके।

7.   दंपत्ति को प्रथम बार में जुड़वा संतान उत्पन्न होने की स्थिति में परिवार पूर्ण माना जाये और अगली संतान की उत्पत्ति कानून का उल्लंघन मानी जाये। दूसरे बच्चे के समय जुड़वा संतान होना एक अपवाद माना जाये और ऐसी स्थिति में कानून प्रभावी हो जाये।

8.   जाति, धर्म से ऊपर उठकर यह प्रावधान स्पष्ट रूप से रहे कि पहली शादी से दो जीवित संतानों के साथ तलाक होने की स्थिति में स्त्री या पुरुष में से कोई भी दूसरी शादी के बाद संतानों उत्पत्ति के अधिकारी नहीं रहेंगे, भले ही दूसरे जीवनसाथी को पहले से अथवा पहली शादी से कोई संतान ना हो। अगर एक बच्चा हो तो केवल एक बच्चे की उत्पत्ति का अधिकार रहे।

    देश के विभिन्न राज्यों जिनमें उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, उड़ीसा, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर आदि शामिल है, से जागरूक एवं राष्ट्रभक्त नागरिक जनसंख्या समाधान फाउन्डेशन की जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग हेतु एकजुट हो रहे हैं।

    चूंकि जनसंख्या वृद्धि से उपजा संकट नाभिकीय युद्ध के संकट से भी विकट साबित हो रहा है, इसलिए सभी जागरूक नागरिकों, बुद्धिजीवियों, महत्वपूर्ण सामाजिक चिंतकों एवं मीडिया से आशा की जाती है कि सभी एक साथ मिलकर इस गंभीर समस्या के एकमात्र उपाय जनसंख्या नियंत्रण कानून को बनवाने में अपना अपेक्षित योगदान दें।

    भारत माता की जय